सोमवार, 23 मार्च 2020

सुकन्या समृद्धि योजना के कुछ नियम बदले

 फाइनेंस मिनिस्ट्री (finance ministry) ने सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana-SSY) में बदलाव करने के लिए कुछ समय पहले एक नोटिफिकेशन जारी किया था। भले ही इस स्कीम में कोई बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं, लेकिन थोड़े बहुत संशोधन (modifications) जरूर किए गए हैं। सरकार ने SSY के कुछ नियमों में स्पष्टीकरण भी दिया है।
आइये जानते हैं किस तरह के हुए बदलाव :

उच्च ब्याज दर (Higher interest rate)

SSY स्कीम में अगर अकाउंट होल्डर्स किसी फाइनेंशियल ईयर में न्यूनतम राशि 250 रुपये भी जमा नहीं करते हैं तो डिफॉल्ट अकाउंट के तौर पर माना जाता है। अब ऐसे डिफॉल्ट अकाउंट में जमा रकम पर वही इंट्रेस्ट रेट मिलेगा, जो स्कीम के लिए तय किया गया होगा। पहले इस तरह के अकाउंट पर इंट्रेस्ट रेट पोस्ट ऑफिस बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज दर के बराबर मिलता था। मौजूदा समय में सुकन्या समृद्धि योजना खाते पर 8.7 फीसदी और पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट पर 4 फीसदी ब्याज दर मिलती है। 

प्रीमेच्योर अकाउंट क्लोज करने के नियमों में बदलाव (Premature closure of account)
नए नियमों के मुताबिक, बालिका की मृत्यु या अनुकंपा (compassionate) के आधार पर SSY अकाउंट को मेच्योरिटी पीरियड से पहले बंद करने की अनुमति दी जाएगी। उदाहरण के लिए  अनुकंपा के आधार पर ऐसे मामले शामिल हैं जब अकाउंट हल्डर को किसी गंभीर बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट कराना हो या अभिभावक की मौत हो गई हो। इससे पहले, सुकन्या समृद्धि अकाउंट को परिपक्वता अवधि से पहले तभी बंद किया जा सकता था, जब खाताधारक की मौत हो गई हो या बच्ची का निवास स्थान बदल गया हो।

अकाउंट का संचालन (Operation of account) 
नए नियमों के तहत जिस बच्ची के नाम से अकाउंट है, वो जब तक 18 साल की नहीं हो जाती, तब तक अपने अकाउंट का संचालन अपने हाथ में नहीं ले सकती है। पहले ये नियम 10 साल की उम्र में था। जब बच्ची 18 साल की हो जाएगी तो उसे संबंधित डॉक्यूमेंट पोस्ट ऑफिस या बैंक में जमा करके अपने अकाउंट का संचालन कर सकती है।

अकाउंट ओपन कराना (Account Opening)
अब दो से अधिक बच्चियों का सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलवाने के लिए अतिरिक्त डॉक्यूमेंट्स जमा कराने की जरूरत पड़ेगी। नए नियम के तहत अगर दो से अधिक बच्ची का अकाउंट ओपन कराना हो तो बर्थ सर्टिफिकेट के साथ-साथ एक एफिडेविट (affidavit) भी देना होगा। इससे पहले, अभिभावक को बच्ची का केवल मेडिकल सर्टिफिकेट देने की जरूरत होती थी।

( m.moneycontrol.com से साभार )

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें