MICR - Magnatic Inc Character Recognition
MICR कोड का प्रयोग बैंकिंग संस्थाओं द्वारा अपने चेक्स को अधिक सुरक्षित बनाने की दृष्टि से किया जाता है।
आजकल सभी बैंक केवल CTS2010 चिह्न वाले चेक ही क्लीयरिंग हेतु स्वीकार करती है। ऐसे चेकों को बैंक क्लियरिंग द्वारा तुरंत प्रोसेस्ड करके ग्राहक के खाते में जमा कर देती है। CTS चेकों पर नीचे श्वेत पट्टी पर चेक संख्या के अलावा कुछ चिन्ह और संख्याएँ भी लिखी रहती है। जो विशेष प्रकार की चुम्बकीय स्याही जो आयरन ऑक्साइड से बनती है, से चेक पर छापे जाते हैं। इनको CTS मशीन द्वारा ही पढ़ा जा सकता है।यहां तक कि यदि इन चिन्हों पर स्टाम्प मोहर या स्याही लग जाती है तो भी क्लीयरिंग मशीन इन्हें पढ़ लेती है।
MICR कोड्स होने से चेकों की छंटाई का काम आसान हो जाता है। माइकर कोड की सहायता से एक साथ क्लीयरिंग में आये बहुत सारे चेकों को बैंक और फिर बैंक की शाखाओं के अनुसार छंटनी करने में सुविधा होती है।
MICR का चलन सन् 1980 से शुरू हुआ। MICR कोड में 9 संख्या होती है।
पहली तीन संख्या, शहर को दर्शाती हैं। ये तीन संख्या उस शहर के पिन कोड के पहले तीन अंक होते हैं। जैसे मुम्बई के पिन कोड के पहले तीन अंक 452 हैं। तो किसी बैंक की मुम्बई स्थित शाखा के चेक के MICR कोड के पहले तीन अंक होंगे- 452.
MICR कोड के अगले तीन अंक से बैंक का नाम पता चलता है। भारत में प्रत्येक बैंक को एक विशेष अंक प्रदान किया गया है, जैसे SBI का अंक है-002
अतः SBI के चेकों पर MICR कोड के चौथे, पांचवे और छठे अंक होंगे- 002
MICR कोड के अंतिम तीन अंक बैंक की शाखा को प्रदर्शित करता है
MICR कोड का प्रयोग बैंकिंग संस्थाओं द्वारा अपने चेक्स को अधिक सुरक्षित बनाने की दृष्टि से किया जाता है।
आजकल सभी बैंक केवल CTS2010 चिह्न वाले चेक ही क्लीयरिंग हेतु स्वीकार करती है। ऐसे चेकों को बैंक क्लियरिंग द्वारा तुरंत प्रोसेस्ड करके ग्राहक के खाते में जमा कर देती है। CTS चेकों पर नीचे श्वेत पट्टी पर चेक संख्या के अलावा कुछ चिन्ह और संख्याएँ भी लिखी रहती है। जो विशेष प्रकार की चुम्बकीय स्याही जो आयरन ऑक्साइड से बनती है, से चेक पर छापे जाते हैं। इनको CTS मशीन द्वारा ही पढ़ा जा सकता है।यहां तक कि यदि इन चिन्हों पर स्टाम्प मोहर या स्याही लग जाती है तो भी क्लीयरिंग मशीन इन्हें पढ़ लेती है।
MICR कोड्स होने से चेकों की छंटाई का काम आसान हो जाता है। माइकर कोड की सहायता से एक साथ क्लीयरिंग में आये बहुत सारे चेकों को बैंक और फिर बैंक की शाखाओं के अनुसार छंटनी करने में सुविधा होती है।
MICR का चलन सन् 1980 से शुरू हुआ। MICR कोड में 9 संख्या होती है।
पहली तीन संख्या, शहर को दर्शाती हैं। ये तीन संख्या उस शहर के पिन कोड के पहले तीन अंक होते हैं। जैसे मुम्बई के पिन कोड के पहले तीन अंक 452 हैं। तो किसी बैंक की मुम्बई स्थित शाखा के चेक के MICR कोड के पहले तीन अंक होंगे- 452.
MICR कोड के अगले तीन अंक से बैंक का नाम पता चलता है। भारत में प्रत्येक बैंक को एक विशेष अंक प्रदान किया गया है, जैसे SBI का अंक है-002
अतः SBI के चेकों पर MICR कोड के चौथे, पांचवे और छठे अंक होंगे- 002
MICR कोड के अंतिम तीन अंक बैंक की शाखा को प्रदर्शित करता है
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