बजट 2018 के आयकर कानून में एक नया सेक्शन जोड़ा गया था- Section 80 TTB. जिसके अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों को किसी वित्त वर्ष में 50,000 रुपये तक की ब्याज आय पर टैक्स छूट मिलती है.
सेक्शन 80 TTB के द्वारा सीनियर सिटीजन किसी वित्त वर्ष में कमाए गए कुल ब्याज में से 50,000 रुपये तक टैक्स में छूट ले सकते हैं.
इसमें ध्यान रखने की बात यह है कि सभी ब्याज आय पर डिडक्शन क्लेम नहीं किया जा सकता है.
सेक्शन 80 टीटीबी के तहत केवल बैंक,कोऑपरेटिव सोसाइटी या पोस्ट ऑफिस में जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज के लिए टैक्स से छूट का दावा किया जा सकता है.
अर्थात इन तीन संस्थानों में डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज सेक्शन 80 TTB के दायरे में आएगा. इसके अलावा डाकघर की कर्इ अन्य सेविंग स्कीमों से मिलने वाले ब्याज पर भी कटौती क्लेम की जा सकती है. इनमें सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम अकाउंट, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट, 5 साल के रेकरिंग डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं.
इन्हें छोड़कर किसी भी अन्य स्रोतों से होने वाली ब्याज आय सेक्शन 80 TTB के दायरे में नहीं आएगी.
यानी बॉन्ड और डिबेंचर से कमाए गए ब्याज के लिए इस सेक्शन के तहत कटौती क्लेम नहीं की जा सकती है.
सेक्शन 80 TTB के द्वारा सीनियर सिटीजन किसी वित्त वर्ष में कमाए गए कुल ब्याज में से 50,000 रुपये तक टैक्स में छूट ले सकते हैं.
इसमें ध्यान रखने की बात यह है कि सभी ब्याज आय पर डिडक्शन क्लेम नहीं किया जा सकता है.
सेक्शन 80 टीटीबी के तहत केवल बैंक,कोऑपरेटिव सोसाइटी या पोस्ट ऑफिस में जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज के लिए टैक्स से छूट का दावा किया जा सकता है.
अर्थात इन तीन संस्थानों में डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज सेक्शन 80 TTB के दायरे में आएगा. इसके अलावा डाकघर की कर्इ अन्य सेविंग स्कीमों से मिलने वाले ब्याज पर भी कटौती क्लेम की जा सकती है. इनमें सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम अकाउंट, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट, 5 साल के रेकरिंग डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं.
इन्हें छोड़कर किसी भी अन्य स्रोतों से होने वाली ब्याज आय सेक्शन 80 TTB के दायरे में नहीं आएगी.
यानी बॉन्ड और डिबेंचर से कमाए गए ब्याज के लिए इस सेक्शन के तहत कटौती क्लेम नहीं की जा सकती है.

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